मुझे हमेशा से इस बात की कोफ़्त होती रही है कि, भारत और भारतीयता का सबसे अच्छा विश्लेषण भारतीयों ने नहीं किया है। एक मेक्समुलर थे जिन्होंने सबसे पहले आदिग्रंथ ऋगवेद को जानने-समझने की कोशिश की। एक जेम्स प्रिन्सेप थे, जिन्होंने ब्राह्मी लिपि को पढने में सफलता पाई तब कहीं जाकर चांडाल अशोक का प्रियदर्शी अशोक वाला स्वरुप सामने आया। मेरी समझ से भारत का सबसे अच्छा इतिहास भी एक विदेशी ए एल बासम ने 'A wonder that was India' के नाम से लिखा। इसी कड़ी में मैं एक और नाम जोड़ना चाहूँगा, जो लोकप्रियता के मामले में उपरोक्त किन्ही के आस पास भी नहीं ठहरते, परन्तु उन्होंने भी भारतीय इतिहास को एक अलग तरीके से देखने समझने कि कोशिश की है। ये हैं ब्रिटिश इतिहासकार माइकेल वुड।
माइकेल वुड ने बी बी सी के लिए कई ऐतिहासिक वृतचित्रों का निर्माण किया है, जो मेरे विचार से खुद भी ऐतिहासिक है। उन्हीं में से एक है 'द स्टोरी ऑफ़ इंडिया'। भारतीय इतिहास मेरे रूचि का विषय रहा है। आर्यों के आगमन से ले कर अंग्रेजों के प्रस्थान तक इसके हर एक पहलु ने मुझे रोमांचित किया है। वेद की ऋचाएं, गौतम बुदध की शिक्षाएं, मौर्यों, गुप्तों और मुगलों की महत्वाकांक्षा, अकबर की धार्मिक सहिष्णुता, भारत और पाश्चात्य दुनिया का संयोग और गांधी का सत्य एवं अहिंसा के साथ प्रयोग, यहाँ सब कुछ कितना कुछ गौरवशाली सा महसूस होता है। माइकेल वुड ने इन्ही बातों को अपने वृतचित्र के माध्यम से कहा है परन्तु एक ताज़ी खुशबू के साथ।
छः भागों में बनी इस वृतचित्र का पहला भाग भारत भूमि पर मानव के पहले कदम की कहानी से शुरू होता है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से होते हुए ये कहानियां आर्यों के गमनागमन के दौर में पहुँचती है। और भारत की कहानी की शुरुवात होती है। द स्टोरी ऑफ़ इंडिया का दूसरा भाग भारत में एक नए धर्मं बौद्ध धर्मं के उदय तथा इसका विदेशों में प्रचार प्रसार की कहानी है। इसी भाग में भारत में सिकंदर का भी आगमन होता है, जिसके आगमन ने भारतीय इतिहास को एक नई दिशा दी। तीसरा भाग भारत और दुनिया के अन्य भागों के बीच व्यापार की कहानी कहता है। रेशम और मशालों के बल पर भारत 'सोने की चिड़िया' का ताज हासिल कर लेता है । इसी समय मंजर पर एक और विदेशी राजा की कहानी शुरू होती है, ' शक सम्राट कनिष्क'। कहानी का चौथा भाग भारत के स्वर्णिम काल की कहानी है। मौर्यों के बाद गुप्तों ने भारत की कहानी को आगे बढाया और इसी समय दक्षिण भारत में चोल सम्राट राजाराज अपनी सभ्यता और संस्कृति के साथ सुदूर पूर्व के जावा और सुमात्रा, आधुनिक इंडोनेशिया तक पहुँच जाते हैं। भारत की कहानी का अगला भाग दो सागरों अरब सागर और फारस के खाड़ी के मिलन की कहानी है। सागरों के मिलन की इस कहानी में भारत में एक और नए धर्म का आगमन होता है 'इस्लाम'। और इस के आगमन से भारत की राजनितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सभी पहलुओं में एक जबरदस्त बदलाव आता है। कहानी का अंतिम भाग भारत में यूरोपियनों के आगमन और आधुनिक भारत के नीव की कहानी है। और यहाँ आकर 'द स्टोरी ऑफ़ इंडिया' का अवसान हो जाता है।
अब कोई भी यह सोच सकता है की इस कहानी में चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर राजपूतों, मुगलों, मराठों, यहाँ तक की स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता किसी का भी तो जिक्र नहीं है। शायद एक और विदेशी ने भारत को समझने में गलती कर दी। पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ' द स्टोरी ऑफ़ इंडिया' सभ्यताओं के मिश्रण की कहानी है। यह केवल राजाओं का इतिहास नहीं कहती है, न हीं यह दुर्दांत अपराजेय आक्रमणकारियों की कहानी है। यह बदलावों की कहानी बखान करती है और निश्चय हीं उन बदलावों में थोड़ी-थोड़ी कहानी राजाओं, योद्धाओं, कलाकारों, महापुरुषों और आमजनों की भी होती है।
A wonder that is Tendulkar
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*Dada was left out of the Indian squad and whole Bengal was shouting for
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15 years ago
