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स्लेट पर
खल्ली का रंग
सफ़ेद था,
जैसे सादगी और सच्चाई !


किशोरवय
की लालिमा ने,
सफेदी को गले लगाया,
आजकल यह गुलाबी है
!

पता नहीं कब,
लालिमा होगी रक्तिमा
और मेरी बेलगाम कलम से निकलेगी
ख़ूनी स्याही !

4 comments:

  1. आज वास्तव में एक ऐसी लेखनी की जरूरत है जो हमारे सोए हुए मन को झकझोर दे । आपकी खूनी स्याही से मुझे बड़ी आशा है ।

  1. बहुत अच्छा,,,लिखते रहिये....

  1. Kya Sachin ! Ham Bhi Thoda Bahut Hindi Padhne Ke bad smajhate hain. Is Post me tum Chhath( Dala Chhath) Ke alava Kya Philosophy diye Ho?

  1. khushkismat ho tum ki tumhara nam bhi Sachin hai.