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मेरी एक दोस्त के लिए, जिसे मेरी बहुत फिक्र होती है।

डर नहीं लगता तुम्हे ?
सब अपनी सोचते हैं !
हर बार तुम हीं क्यूँ ?
फिक्र होती है मुझे तुम्हारी !
ऐसी कितनी हीं बातें,
तुम एक हीं साँस में बोल गई।

डर किसे नहीं लगता,
और मैं भी तो,
केवल अपने हीं बारे में सोचता हूँ।
पर फिक्रमंद हो,
जब-जब तुमने पूछा है!
हर बार तुम हीं क्यूँ ?

मुझे गर्व हुआ है,
खुदपर।
मैं उन सौभाग्यशालियों में हूँ,
जिसमें,
गलत को गलत,
कहने की हिम्मत है।

1 comments:

  1. hmmmmmmmmmmmm,,,,,,sabash beta i mean hippooo;aj se teri wo dost vi befikr hui,,